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अधंरग


अधंरग

Paralysis


मसाज से रोगों का उपचार :

परिचय-

          अधरंग नामक इस रोग का दूसरा नाम पक्षाघात (लकवा) है। शरीर के दाएं या बाएं अंग का बेकार हो जाना इस रोग का लक्षण है। मनुष्य के गलत रहन-सहन और गलत खान-पान के कारण और तथा नस-नाड़ियों पर अधिक चर्बी एकत्रित हो जाने के कारण, नस-नाड़ियां बेकार हो जाती हैं। मनुष्य को यह रोग 40 से 45 साल की आयु के बाद ही होता रहता है।

चिकित्सा-

          अधंरग (लकवा) रोग की शुरूआत में ही सही इलाज करके और मालिश, भोजन-सुधार तथा अन्य प्राकृतिक उपचारों से इस रोग से जल्दी छुटकारा पाया जा सकता है। इस रोग में दवाइयों आदि का सेवन कराना रोगी के लिए बेकार है क्योंकि दवाइयों आदि से यह रोग दूर नहीं किया जा सकता है। रोग यदि पुराना हो जाए तो इसका उपचार करने में बहुत अधिक समय लगता है।

        अधरंग रोग में मालिश, `एपसम बाथ´ और `वाष्प-स्नान´ का प्रयोग काफी लाभदायक होता है। वैसे गर्म-ठण्डी मालिश भी इस रोग में अच्छा नतीजा दे सकती है।

        रोगी की मालिश में मसलना, मरोड़ना, थपथपाना, दलना, घर्षण देना, मुक्की मारना, अवश्य कराएं। रोगी को सप्ताह में 2 बार वाष्प-स्नान और 2 बार `एपसम बाथ´ से गर्म-ठण्डा स्नान अवश्य कराएं। पीठ पर गर्म-ठण्डा सेंक भी अधरंग की बीमारी में लाभ पहुंचाता है। सेंक इस प्रकार दें कि 3 मिनट गर्म और 1 मिनट ठण्डा सेंक। रोगी को यह सेंक 4 बार देना चाहिए। इससे रोगी को आराम पहुंचेगा क्योंकि नस-नाड़ियां पीठ से ही होकर हमारे सभी शरीर में फैलती हैं।

परहेज-

          इस रोग में रोगी के भोजन में भी उचित सुधार की आवश्यकता होती है। रोगी को फल, सब्जियां, कच्ची सब्जियों का सलाद, चोकर के आटे की रोटी, सूखे फल और ताजा दूध आदि अधिक-से-अधिक देने चाहिए।

Tags: Masalna, Thapthapana, Marodna, Kacchi sabjiyon ka salad