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कील-मुहांसे


कील-मुहांसे

Acnes and comedo


मसाज से रोगों का उपचार :

कील-मुहांसे त्वचा के रोग होते हैं जिनसे चेहरे की खूबसूरती पर बुरा प्रभाव पड़ता है। जब लड़कियां किशोरावस्था पार करके जवानी में कदम रखती हैं परिचय-

          कील-मुहांसे त्वचा के रोग होते हैं जिनसे चेहरे की खूबसूरती पर बुरा प्रभाव पड़ता है। जब लड़कियां किशोरावस्था पार करके जवानी में कदम रखती हैं तो लगभग 50 प्रतिशत लड़कियों के चेहरे पर कील-मुहांसों के रूप में छोटी-छोटी फुंसियां उभर आती हैं। इसका कारण होता है, त्वचा के नीचे की तैलीय ग्रंथियों का अति सक्रिय होना। रोमछिद्रों के साफ न होने के कारण उनका तैलीय अंश चेहरे पर जम जाता है। अत: उस स्थान पर छोटी-छोटी फुंसियां हो जाती हैं। यह फुंसिया प्राय: पहले लाल होती हैं इसके बाद उनके ऊपर का हिस्सा काला पड़ जाता है। कई बार इन फुंसियों में पीप भी पड़ जाती है जिनमें काफी कष्ट होता है। उसके नीचे सफेद गांठ-सी जम जाती है, जिसे `कील´ कहते हैं।

          पुरुषों की तुलना महिलाओं की शारीरिक बनावट में अन्तर होता है। जब लड़की किशोरावस्था में आती हैं या जवानी की ओर बढ़ने लगती हैं तो उसके शरीर की हार्मोन्स प्रक्रिया में विशेष परिवर्तन होता है। इस कारण तैलीय ग्रंथियों में अधिक स्राव होने लगता है। उसके बाद रोमछिद्रों का मार्ग बन्द हो जाने से उस स्थान पर सूजन हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप उसके ऊपर का भाग कील-मुहांसों के रूप में उभर आता है।

          यदि कील-मुंहासों में मवाद पड़ जाने के कारण अधिक कष्ट हो तो डॉक्टर से परामर्श करना बेहद जरूरी है। डॉक्टर पस और सूजन दूर करने के लिए एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं। उनसे कुछ हद तक लाभ होता है परन्तु कई बार कील-मुहांसों के ठीक होने के बाद वहां दाग-धब्बे हो जाते हैं। उनसे भी चेहरे की सुन्दरता नष्ट होती है। कई बार अत्यंत विकट स्थिति में कॉस्मैटिक सर्जरी आवश्यक हो जाती है परन्तु कील-मुहांसों की समस्या दूर करने के लिए जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। विटामिन `ए´ या इससे युक्त पदार्थों का प्रयोग कील-मुहांसों से बचाव करने में सहायक होता है।

        कील-मुहांसों को दूर करने के लिए आवश्यक है कि त्वचा के नीचे की तैलीय ग्रंथियों को वास्तविक स्थिति में लाया जाए। प्राय: कील-मुहांसे किशोरावस्था के बाद लड़की के पूर्ण युवा होने पर खुद समाप्त हो जाते हैं लेकिन कील-मुहांसों को दबाकर उनमें से वसा या जमा हुआ सफेद भाग निकालने का प्रयास नहीं करना चाहिए। उससे जख्म बढ़ जाता है और चेहरे पर दाग-धब्बे बन जाते हैं।

          कील-मुहांसों का कारण खून की खराबी, पेट का साफ न होना और आंतों के कीड़े आदि होते हैं। इसलिए कील-मुहांसे से ग्रस्त लड़कियों को अपने रक्त, मल और मूत्र आदि की जांच करवानी चाहिए। यदि इस जांच में पेट में कीड़े हों या रक्त आदि दूषित हों तो डॉक्टर से ही चिकित्सा करवानी चाहिए। जब तक इनके ठीक होने का प्रमाण न मिल जाए तब तक इलाज करवाते रहना चाहिए।

उपचार-

          कील-मुहांसे वाले चेहरे पर किसी चीज को लगाने की बजाए चेहरे को साफ रखना काफी आवश्यक है ताकि धूल, मिट्टी आदि उन पर जमने न पाए। इसके लिए कम से कम दिन में 2 बार किसी औषधियुक्त साबुन से चेहरे को साफ किया जाना चाहिए।

  • कई बार ऐसा होता है कि कील-मुहांसों में खिंचाव के कारण त्वचा खुश्क मालूम होती है। परन्तु यह खुश्की त्वचा में चिकनाई की कमी से न होकर त्वचा के ऊपरी भाग में नमक की कमी के कारण अनुभव होती है। इसे दूर करने के लिए खीरे के रस और शहद को मिलाकर चेहरे पर लगाने से लाभ मिलता है।
  • शहद, दही और अण्डे की सफेदी को मिलाकर चेहरे पर लगाने से लाभ होता है। शहद त्वचा की नमी को बरकरार रखता है। दही में लैक्टिक एसिड नामक क्षार से त्वचा के निखरने में सहायता मिलती है जबकि अण्डे की सफेदी त्वचा का ढीलापन दूर करके त्वचा के नए ऊतकों का निर्माण करती है।
  • कील-मुहांसों की बीमारी को दूर रखने के लिए खून को साफ रखना पड़ता है। इसके लिए भोजन करने के बाद हल्की भुनी सौंफ चबाते रहने से बहुत लाभ होता है। इससे भोजन को हजम करने में सहायता मिलती है और पेट आसानी से साफ हो जाता है।
  • रात को सोने से पहले 3 से 4 मुनक्के और 1 से 2 सूखें अंजीर को गर्म पानी से साफ करके कांच के बर्तन में भिगों दें। सुबह कुल्ला करके मुनक्का और अंजीर को गर्म पानी में मसल लें। इसे नियमित रूप से पीने पर पेट साफ होता है और शरीर को ताकत मिलती है।
  • रात को सोने से पहले त्रिफला का चूर्ण गर्म दूध के साथ लेने से सुबह के समय पेट साफ हो जाता है। ध्यान रहें कि इसका सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे आंतें कमजोर होती हैं, इसलिए अदल-बदलकर चीजों का सेवन करना चाहिए।
  • भोजन में परिवर्तन करके फलों, सब्जियों और सलाद आदि का प्रयोग करना चाहिए। इससे शरीर में विटामिनों की कमी पूरी होने के साथ खून की सफाई होने लगती है। इसके परिणामस्वरूप चेहरे के कील-मुहांसे कुछ ही समय में समाप्त हो जाते हैं।
  • संतरे के छिलकों को छाया में सुखाकर अच्छी तरह से कूटकर बारीक चूर्ण बना लें। फिर इस चूर्ण का थोड़ा-सा भाग लेकर उसमें बेसन या मुलतानी मिट्टी तथा पानी मिला लें। इस चूर्ण के 10 से 15 मिनट भीग जाने के बाद इसका गाढ़ा लेप मुहांसों पर करें। आधे घण्टे बाद गुनगुने पानी से धीरे-धीरे चेहरा साफ कर लें। इस प्रकार 2 से 4 सप्ताह तक यह क्रिया करने और पेट साफ रखने से कील-मुहांसे समाप्त हो जाते हैं।
  • संतरे के छिलकों को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। फिर इस चूर्ण में गुलाबजल मिलाकर कील-मुहांसों पर लगा लें। इससे चेहरे पर पड़ी झाईयां दूर हो जाती हैं और चेचक के दाग भी धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं।
  • मुहांसों के लिए 7 दिनों में केवल एक बार गर्म पानी का बर्तन मुंह के सामने रखकर सिर पर तौलिया डाल लें और आंखें बन्द करके गर्म पानी की भाप चेहरे पर लें। इससे चेहरे के रोमछिद्र खुल जाते हैं जो मुहासों को दूर करने के लिए लाभदायक होते हैं।
  • सिर में अधिक रूसी होने के कारण भी चेहरे पर मुहांसें पैदा हो जाते हैं, इसलिए चाहिए कि सिर से रूसी को जल्द-से-जल्द पॉउडर और शैम्पू की मदद से निकलवाना चाहिए।
  • हमारे खान-पान का भी कील-मुहांसों पर बहुत प्रभाव पड़ता है। भोजन में हरी सब्जियां, फलों, सलाद, मछली तथा मुर्गा आदि का प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा तली हुई चीजों, अधिक मसालेदार भोजन, बाजार की मिठाइयां, टॉफियों, चॉकलेट और आइसक्रीम आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • कील-मुहांसों से बचने के लिए गर्मी के दिनों में हर व्यक्ति को रोजाना 6 से 8 गिलास तक पानी पीना चाहिए।

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