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गांठ का घुमाना (जोन्ट मूवमेंटस)


गांठ का घुमाना (जोन्ट मूवमेंटस)

Joints movements


मसाज से रोगों का उपचार :

        मालिश करते हुए जोड़ों को घुमाना काफी लाभकारी होता है। गांठ घुमाने की क्रिया के अनेक ढंग हैं। साधारणत: गांठ घुमाने में जोड़ को चक्राकार घुमाया जाता हैं। संधि-प्रसारण के साथ ही गांठ-मरोड़ की क्रिया भी रोगी को देनी चाहिए। अपनी अंगुलियों और अंगूठे की मदद से हाथ, बाजू, पांव, कंधा और घुटने आदि की गांठों को मालिश देते समय चक्राकार कई बार घुमाएं। फिर इन अंगों को पकड़कर जोड़ों से झटके दिए जाने चाहिए। ये झटके कुछ हल्के तथा कुछ जोर से देने चाहिए। ऐसे झटके एक अंग या जोड़ पर ऊपर-नीचे करके कई बार देने चाहिए।

        अक्सर रोगी व्यक्तियों के शरीर का विकार उसके जोड़ों में जमा हो जाता है। विकार स्वस्थ व्यक्तियों के जोड़ों में भी इकट्ठा हो जाता है। गांठ घुमाने और झटके देने की इस क्रिया से जोड़ खुल जाते हैं, जिससे वहां रक्त का संचार बड़ी तेजी से होता है और विकार वहां से निकल जाता है। इस क्रिया को एक प्रकार का व्यायाम भी कहा जा सकता है।

प्रभावकारी-

        गांठ घुमाने की क्रिया का विशेष प्रभाव अस्थियों और जोड़ों की मांसपेशियों पर अधिक पड़ता है। मांसपेशियों के प्रसार और संकोच क्रिया से उसमें नई चेतना आने लगती है।

लाभकारी-

        गांठ घुमाने का प्रयोग वात रोगों और अधरंग यानी शरीर के आधे भाग में लकवा आना आदि में किया जा सकता है। स्वस्थ व्यक्तियों की मालिश में भी गांठों को घुमाना लाभदायक है। इस क्रिया को करते समय मालिश करने वाले को इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि उसकी गांठ घुमाने से रोगी पीड़ा का अनुभव न करे। यदि रोगी के जोड़ों या कहीं शरीर में अधिक दर्द है और जोड़ बहुत सख्त हो रहे हैं, तो उसकी गांठों को बहुत धीरे-धीरे घुमाना चाहिए तथा धीरे से ही जोड़ों को चलाना चाहिए।