गुग्गुल


गुग्गुल

Bedeliyam


A  B  C  D  E  F  G  H  I J  K  L  M  N  P  R  S T  U  V  Y
[ G ] से संबंधित आयुर्वेदिक औषधियां

गदहपुरना

गुड़मार

गजपीपल

गाजर

जंगली गाजर

जंगली गाजर के बीज

गन्दा बहरोजा

गाजर के बीज

गंभारी

गंदना

गंधप्रियंगु (फूल प्रियंगु)

ग्वार

गुरलू

गुंजा

गुंदना पहाड़ी

गुंदना के बीज

गुलू

गंधक

गंगेरन

गंगेरुबा

गांजा

घी (ब्यूटीरम डेप्यूरम)

गेरू

गेंदा

जंगली गेहूं

गुलतुर्रा

गुलरोगन

गुलनार

गुलकन्द

गूलर

गुलाची

गुल गांव जुबां

गुलदुपहरिया

गेहूं

गांव जुबां

गवेधुका

गठिवन

गरजन

गन्ने का रस

घीकुंवार

घुंघची

ग्लिसरीन

गिलोय

गिलोय का रस

गोभी

जंगली गोभी

गुलाब का जीरा

गुलाब जामुन

गुलाब

गुलमेंहदी

गोखरू

गोल लौकी

गोल मिर्च

गोमा (द्रोणपुष्पी)

गोंद

गोंद पटेर

गोंडल

गोंदनी

गोरखमुंडी

गुड़

गुड़हल

ग्वारफली

ग्वारपाठा (घृतकुमारी)

गुलदाउदा

गुग्गुल

गुडूची सत्व

गुंदना

Read more articles

गुग्गुल एक प्रकार की ऐसी औषधि है जो राजस्थान में अधिक मात्रा में पाई जाती है यह पूरे भारत में पाई जाती है। वैसे आबू पर्वत पर पैदा होने वाला गुग्गुल अच्छा सबसे अच्छा माना जाता है। परिचय :

          गुग्गुल एक प्रकार की ऐसी औषधि है जो राजस्थान में अधिक मात्रा में पाई जाती है यह पूरे भारत में पाई जाती है। वैसे आबू पर्वत पर पैदा होने वाला गुग्गुल अच्छा सबसे अच्छा माना जाता है। इसका पेड़ 120 सेंटीमीटर से  लेकर 360 सेंटीमीटर तक ऊंचा होता है। गुग्गुल की शाखाओं पर कांटें लगे होते हैं। शाखाओं की टहनियों पर भूरे रंग का पतला छिलका भी होता है जो उतरता हुआ नज़र आता है। गुग्गुल की छाल हल्की हरी तथा पीलापन लिए हुए चमकीली और परतदार होती है। गुग्गुल के पत्ते नीम के पत्ते के समान छोटे-छोटे, चमकीले, चिकने व आपस में मिले हुए होते हैं। इसके फल बेर के समान लंबे, गोल, तीन धार वाले तथा लाल रंग के होते हैं। गुग्गुल के फूल लाल रंग के छोटे, पंचदल युक्त होते हैं। पेड़ से डालियों से जो गोंद निकलता है, उसे गुग्गुल कहते हैं। इसमें रोग को ठीक करने के लिए कई प्रकार के गुण पाये जाते हैं जिसके फलस्वरूप रोग ठीक हो जाते हैं।

विभिन्न भाषाओं में नाम :-

संस्कृत गुग्गुल।
हिन्दी गुग्गुल।
अंग्रेजी इण्डियन बेदेलियम।
मराठी गुग्गुल।
गुजराती गुग्गुल।
कन्नड़ गुग्गुल।
बंगाली गुग्गुल।
तेलगू महिषाक्षी।
अरबी मुश्किले, अर्जक।
फारसी बोएजहुदान।
लैटिन कोमिफोरा मुकुल।

रंग :- गुग्गुल काले और लाल रंग का होता है।

स्वाद :- इसका स्वाद कड़ुवा होता है।

स्वरूप :- गुग्गुल का पेड़ रेतीली और पर्वतीय भूमि में पाया जाता है। इसके पत्ते छोटे-छोटे नीम के पत्तों के समान तथा फूल बिल्कुल छोटे-छोटे पांच पंखुड़ी वाले होते हैं। इसके फल छोटे-छोटे बेर के समान तीन धार वाला होता है जिसे गुलिया कहा जाता है। इसके फल पेट दर्द को दूर करने में लाभकारी है।

प्रकृति :- गुग्गुल की प्रकृति गर्म होती है।

यूनानी मतानुसार : गुग्गुल तीसरे दर्जे का गर्म प्रकृति वाला एवं सूखा फल होता है। यह  वायु को नष्ट करने वाला, सूजन को दूर करने वाला, दर्द को नष्ट करने वाला, पथरी, बवासीर, पुरानी खांसी, फेफड़ों की सूजन, विष को दूर करने वाला, काम की शक्ति बढ़ाने वाला, टिटनेस, दमा, जोड़ों का दर्द तथा जिगर के रोग आदि प्रकार के रोगों को ठीक करने वाला होता है।

वैज्ञानिक मतानुसार : गुग्गुल का रासायनिक विश्लेषण करने पर पता चलता है कि गुग्गुल में सुगंधित तेल 1.45 प्रतिशत, गोंद 32 प्रतिशत और ग्लियोरेजिन, सिलिका, कैल्शियम, मैग्नीशियम तथा लोहा आदि भी इसमें कुछ मात्रा में पाये जाते हैं। यह रक्तशोधन करके सारे शरीर में उत्तेजना उत्पन्न करता है। गुग्गुल में रक्त (खून) के श्वेत कणों को बढ़ाने का विशेष गुण होतो है जिसके कारण से यह गंडमाला रोग में बहुत लाभकारी है। श्वेत रक्तकण हमारी शरीर में रोग खत्म करने की शक्ति को बढ़ाती है जिसके फलस्वरूप कई प्रकार के रोग नहीं होते हैं।

हानिकारक प्रभाव :

  • गुग्गुल का अधिक मात्रा में सेवन करना यकृत के लिए हानिकारक हो सकता है।
  • गुग्गुल का अधिक सेवन से कमजोरी, नपुंसकता (नमार्दी), मूर्च्छा (बेहोशी), अंगों में ढ़ीलापन, मुंह की सूजन तथा दस्त अधिक आने की समस्यां उत्पन्न हो सकती है।
  • मुंह में छाले, रक्तपित्त, आंखों में जलन, उष्ण वात, पित्त से होने वाला सिरदर्द और पैर का फूल जाना आदि रोगों की अवस्था में गुग्गुल गाय के दूध का घी के साथ सावधानी पूर्वक सेवन करना चाहिए नहीं तो इससे हानि हो सकती है। गुग्गुल का सेवन काल में देर रात तक जागना और दोपहर को सोना नहीं चाहिए क्योंकि इससे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।
  • खट्टे पदार्थ, अधिक भोजन, मैथुन, श्रम, धूप, मद्य और क्रोध आदि अवस्था में गुग्गुल का उपयोग करने से हानि हो सकती है।

दोषों को दूर करने वाला : कतीरा गुग्गुल के गुणों को सुरक्षित रखकर इसके दोषों को दूर करता है।

तुलना : गुग्गुल की तुलना कडु़वा से की जा सकती है।

मात्रा : 2 से 4 ग्राम की मात्रा में गुग्गुल का सेवन कर सकते हैं।

गुण : गुग्गुल पित्त को उत्पन्न करने वाला, दस्त को ठीक करने वाला होता है। यह गर्म, रूखा व हल्का होता है। टूटी हड्डी को जोड़ने का गुण इसमें पाया जाता है। यह वीर्य उत्पन्न करने वाला तथा गला को साफ करने वाला उत्तम रसायन होता है। गुग्गुल अग्निदीपक (भूख को बढ़ाने वाला), बल को बढ़ाने वाला होता है। घाव, मोटापा, प्रमेह, पथरी आदि रोग को ठीक करने में यह लाभकारी है। गुग्गुल कोढ़, आमवात (जोड़ों का दर्द), सूजन और बवासीर को नष्ट करता है। गुग्गुल में मीठा रस होने से यह वात को तथा कषैले रस होने से पित्त को और तीखा रस होने से कफ को नष्ट करता है।

पेचिश, भुख का कम लगना, कब्ज, बवासीर, पेट में कीड़े होना आदि रोगों में गुग्गुल लाभकारी होता है। कामोत्तेजक (सहवास शक्ति)  अधिक होने के कारण आई नपुंसकता (नामर्दी), शुक्र (शुक्राणु) दुर्बलता की कमजोरी को दूर करने के लिए गुग्गुल का प्रयोग करना चाहिए। गुग्गुल में गर्भाशय की नाड़ियों को बल देने का गुण होने के कारण से बांझपन को दूर करने में लाभकारी है।

गुग्गुल पांच प्रकार का होता है :

1.      महिषाक्ष: महिषाक्ष गुग्गुल कोयले के रंग का होता है। इस गुग्गुल को भैंसा गुग्गुल भी कहते हैं।

2.      महानील: महानील गुग्गुल बहुत ही गाढ़े और नीले रंग का होता है।

3.      कुमुद: कुमुद गुग्गुल कुमुद के फूल के रंग के समान होता है।

4.      पद्य: पद्य गुग्गुल माणिक्य के समान लाल रंग का होता है।

5.      हिरण्य: हिरण्य गुग्गुल सोने के समान रंग वाला महिपाक्ष और महानील गुग्गुल हाथियों के लिए लाभकारी होता है। यह गुग्गुल घोडों के रोग दूर करने वाला होता है और मनुष्यों के लिए हिरन नाम वाला ही गुग्गुल लाभदायक और हितकारी होता है लेकिन कुछ चिकित्सा आचार्या के अनुसार महिपाक्ष को भी मनुष्यों के लिए उपयोगी माना जाता है।

कैसा गुग्गुल लेना चाहिए : जो गुग्गुल चिकना हो, स्वर्ण के समान रंग वाला हो, पकी जामुन के समान स्वरूप वाला हो और पीला हो वही गुग्गुल अधिक लाभकारी होता है।

पुराना गुग्गुल: पुराना गुग्गुल दुर्गन्धयुक्त काला, स्वाभाविक और गुणों से हीन होता है।

नवीन गुग्गुल :- नवीन गुग्गुल वीर्य को पैदा करने वाला होता है। यह बल को बढाने वाला होता है। पुराना गुगुल विष के समान होता है।

गुग्गुल की परीक्षा : जो गुग्गुल आग में डालने से जल जाए, गर्मी में रखने से पिघल जाए, गर्म पानी में डालने से गल जाए ऐसा गुग्गुल सबसे अधिक लाभकारी होता है।

शुद्ध करने की क्रिया :-

  • गुग्गुल के टुकड़े-टुकड़े करके मिलाएं और त्रिफला के काढ़े में विशेषकर दूध में डालकर पका लें इससे गुग्गुल शुद्ध हो जाता है। 
  • गिलोय के काढ़े में गुग्गुल को मिलाकर छानने और सुखा देने से गुग्गुल शुद्ध होता है।

 


For reading tips click below links     विभिन्न रोगों में गुग्गुल से उपचार:
1. सिर दर्द:

सिर दर्द:

    • गुग्गुल को पान के साथ पीसकर मस्तक (माथे) पर दिन में 2-3 बार लेप करने से सिर दर्द खत्म होता है।
    • पानी में गुग्गल को पीसकर माथे पर लगाने से सिर का दर्द खत्म हो जाता है।
    2. व्रण (घाव):

    व्रण (घाव):

      • गुग्गुल के चूर्ण को नारियल के तेल में घिसकर लेप बना लें और इसे घाव पर दिन में 3 बार लगाएं इससे घाव ठीक हो जाते हैं।
      • घी में गुग्गुल मिलाकर मलहम बना लें और इस लेप को घाव पर लगाएं इससे घाव ठीक हो जाते हैं।
      • सोहागा, कत्था, गंधक और सलाई गुग्गुल इन सब को मिलाकर मलहम बना लें और इस मलहम को घाव पर लगाएं इससे घाव ठीक हो जाता है। घाव दुर्गन्धित हो तो सलई गुग्गुल को नींबू के रस और नारियल तेल में मिलाकर उस पर लगाएं इससे लाभ मिलेगा।
      3. हिचकी:

      हिचकी:

        • गुग्गुल को जल में घिसकर लेप बना लें। इस लेप को नाभि पर लगाने से हिचकी दूर हो जाती है।
        • गुग्गुल को घी में मिलाकर मलहम की तरह लेप बना लें, इससे अमाशय के ऊपरी भाग पर लेप करें जिसके फलस्वरूप हिचकी दूर हो जाती है।
        4. जोड़ों का दर्द:

        जोड़ों का दर्द:

          • गुग्गुल और सोंठ का चूर्ण समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें और इसे घी में मिलाकर लेप बना लें। इस लेप को जोड़ों पर लगानें से आराम मिलता है।
          • 3 ग्राम शुद्ध की हुई गुग्गुल को 10 ग्राम घी और 3 ग्राम शहद के साथ सेवन करने से जोड़ा के दर्द से आराम मिलता है।
          • 240 से 960 मिलीग्राम की मात्रा में गुग्गुल को शिलाजीत के साथ मिलाकर दिन में 2 से 3 सेवन करें इससे गठिया के दर्द में आराम मिलता है।
          • सलई गुग्गुल को गर्म जल में घिसकर गठिया के दर्द व सूजन पर लगाएं इससे गठिया रोग ठीक हो जाता है।
          • 10 ग्राम गुग्गुल लेकर इसे 20 ग्राम गुड़ में मिलाकर पीसकर इसकी छोटी-छोटी गोलिया बना लें। सुबह-शाम कुछ दिनों तक 1-1 गोली घी के साथ लेने से घुटने का दर्द दूर हो जाता है।
          5. गंजापन:

          जोड़ों का दर्द:

            गुग्गुल को सिरके में घोटकर सुबह-शाम नियमित रूप से सिर पर गंजेपन वाले स्थान पर लगाएं इससे लाभ मिलेगा।
            6. सूजन:

            सूजन:

              किसी भी अंगों पर आई सूजन को दूर करने के लिए गुग्गुल को गर्म पानी में घिसकर लेप बना लें इसको दिन में 2-3 बार कुछ दिनों तक नियमित रूप से सूजन वाले स्थान पर लगाएं इससे लाभ मिलेगा।
              7. गृध्रसी (सियाटिका):

              गृध्रसी (सियाटिका):

                50 ग्राम गुग्गुल में 10 ग्राम लहसुन और 25 ग्राम घी मिलाकर मटर के दानों के बराबर की गोलियां बना लें। 1-1 गोली जल के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से गृध्रसी सियाटिका में लाभ मिलता है।
                8. बवासीर:

                बवासीर:

                  • गुग्गुल को जल में घिसकर लेप बना लें। इस लेप को बवासीर के मस्सों पर लगाने से लाभ मिलता है।
                  • शुद्ध गुग्गल 5 ग्राम, एलुआ 10 ग्राम तथा रसौत 10 ग्राम इन सब को थोड़े-से मुली के रस में मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। प्रतिदिन इसमें से 1-1 गोली सुबह-शाम ताजे पानी के साथ 20 दिन तक खाने से कब्ज खत्म दूर होती है तथा इसके साथ ही बवासीर रोग भी ठीक हो जाता है।
                  • 40 ग्राम गुगल को 125 ग्राम दूध में हल्के आग पर पकाएं जब यह गाढ़ा हो जाए तो इसे ठण्डा करके मटर के बराबर गोलियां बना लें। इसकी 1 गोली रोज सुबह खाली पेट खने से खूनी बवासीर में लाभ मिलता है।
                  • 3 ग्राम शुद्ध गुग्गुल को गर्म पानी के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने दस्त साफ आता है तथा कब्ज की शिकायत भी खत्म हो जाती है जिसके फलस्वरूप बवासीर नष्ट हो जाता है।
                  9. अम्लपित्त (खट्टी डकारें आना):

                  अम्लपित्त (खट्टी डकारें आना):

                    1 चम्मच गुग्गुल का चूर्ण 1 कप पानी में गलाकर 1 घंटे बाद छान लें। भोजन के बाद दोनों समय इस गुग्गुल का सेवन करने से अम्लपित्त से छुटकारा मिल जाता है।
                    10. ग्रंथियों की वृद्धि:

                    ग्रंथियों की वृद्धि:

                      चने का आटा और गुग्गुल बराबर मात्रा में लेकर पानी की सहायता से टिकिया बनाकर गर्म कर लें। यह टिकिया गर्म-गर्म ही ग्रंथि पर बांधने ग्रंथि शीघ्र ही बैठ जाती है।
                      11. कांख (कखवार):

                      कांख (कखवार):

                        गुग्गुल और इमली के बीजों को पानी में पीसकर लेप बनाकर कखवार पर लगाएं इससे लाभ मिलता है।
                        12. दाढ़ में दर्द:

                        दाढ़ में दर्द:

                          गुग्गुल को पानी में घिसकर दाढ़ पर लगाने से दाढ़ का दर्द ठीक हो जाता है।
                          13. सर्दी से होने वाले दर्द:

                          सर्दी से होने वाले दर्द:

                            गुग्गुल और सोंठ को एक साथ घिसकर शरीर पर लेप करके सेंकाई करने से लाभ मिलता है।
                            14. कनखजूरे के काटने पर:

                            कनखजूरे के काटने पर:

                              कनखजूरे के काटने पर गुग्गुल को आग में जलाकर धूंनी देने से लाभ मिलता है।
                              15. गुल्म (पेट में गैस बनना):

                              गुल्म (पेट में गैस बनना):

                                शुद्ध गुग्गुल को गौमूत्र के साथ सेवन करने से गुल्म और दर्द में लाभ मिलता है।
                                16. ब्रोंकाइटिस:

                                ब्रोंकाइटिस:

                                  गुग्गुल 240 से 960 मिलीग्राम की मात्रा को लेकर गुड़ के साथ 2-3 बार सेवन करने से वायु प्रणाली शोथ (ब्रोंकाइटिस) में लाभ मिलता है।
                                  17. फेफड़े संबन्धी रोग:

                                  फेफड़े संबन्धी रोग:

                                    गुग्गुल 0.24 से 0.96 ग्राम की मात्रा को गुड़ के साथ प्रतिदिन 3-4 बार सेवन करने से फुफ्फुस (फेफड़े) सम्बंधी अनेक रोगों में अधिक लाभ मिलता है।
                                    18. अंडकोष की सूजन:

                                    अंडकोष की सूजन:

                                      2-4 ग्राम शुद्ध गुग्गल को 7-14 मिलीलीटर गाय के मूत्र (पेशाब) के साथ सुबह-शाम सेवन करने से अंडकोष की सूजन कम हो जाती है।
                                      19. दमा:

                                      दमा:

                                        दमा रोग में गुग्गुल लगभग आधा से 1 ग्राम मात्रा को सुबह-शाम दोनों समय घी के साथ सेवन करना लाभकारी होगा।
                                        20. फेफड़ों की सूजन:

                                        फेफड़ों की सूजन:

                                          गुग्गुल 120 मिलीग्राम से 960 मिलीग्राम की मात्रा लेकर गुड़ के साथ प्रतिदिन 3-4 मात्राएं लेने से फेफड़ों की सूजन व दर्द में अधिक लाभ मिलता है।
                                          21. खांसी:

                                          खांसी:

                                            24 से 96 मिलीग्राम गुग्गुल को छोटी पीपल, अड़ूसा, शहद और घी के साथ मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से खांसी ठीक हो जाती है।
                                            22. दांतों में कीड़े लगना:

                                            दांतों में कीड़े लगना:

                                              35 मिलीलीटर पानी में 3.50 मिलीग्रम गुग्गुल घोल लें फिर इस घोल में रुई भिंगोकर इसे दांत के गड्ढ़े रखें इससे कीड़े मरकर लार के साथ बाहर आ जाएंगे और दर्द से भी आराम मिलेगा।
                                              23. पायरिया (मसूढ़ों से खून बहना):

                                              पायरिया (मसूढ़ों से खून बहना):

                                                • गुग्गुल को 35 मिलीलीटर पानी में घोलकर लेप बना लें। इस लेप को मसूढ़ों पर मलें। इस प्रकार से प्रतिदिन कुछ दिनों तक लेप करने से पायरिया ठीक हो जाता है।
                                                • 90 प्रतिशत एलकोहाल में 20 प्रतिशत गुग्गुल मिल लें और इससे मसूढ़ों पर प्रतिदिन सुबह तथा शाम को मालिश करें इससे पायरिया रोग ठीक हो जाता है।
                                                24. आमाशय का जख्म:

                                                आमाशय का जख्म:

                                                  240 मिलीग्राम से लेकर 960 मिलीग्राम गुग्गुल की मात्रा सुबह और शाम सेवन करने से आमाशय के रोग में लाभ मिलता है।
                                                  25. फुफ्फुसावरण:

                                                  फुफ्फुसावरण:

                                                    गुग्गुल 240 मिलीग्राम से 960 मिलीग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से फुफ्फुसावरण रोग में लाभ मिलता है।
                                                    26. बांझपन:

                                                    बांझपन:

                                                      गुग्गुल 0.96 ग्राम और रसौत को मक्खन के साथ मिलाकर इसमें से प्रतिदिन 3 खुराक सेवन करने से बांझपन दूर होता है।
                                                      27. मुंह के छाले:

                                                      मुंह के छाले:

                                                        गुग्गुल को मुंह में रखने से या गर्म पानी में घोलकर दिन में 3 से 4 बार इससे कुल्ला व गरारे करने से मुंह के अन्दर के घाव, छाले व जलन ठीक हो जाते हैं।
                                                        28. दस्त:

                                                        दस्त:

                                                          गुग्गुल 240 मिलीग्राम से लेकर 960 मिलीग्राम की मात्रा में सेवन करने से आंतों में जलन होने के कारण होने वाले दस्त ठीक हो जाता है।
                                                          29. मूत्ररोग:

                                                          मूत्ररोग:

                                                            गुग्गुल 0.24 ग्राम से 0.96 ग्राम की मात्रा में गुड़ के साथ सेवन करने से कई प्रकार के मूत्र रोग ठीक हो जाते हैं।
                                                            30. मुंह से बदबू आना:

                                                            मुंह से बदबू आना:

                                                              मुंह से बदबू आने तथा सांसों से बदबू आने पर सलाई गुग्गुल 600 से 1200 मिलीग्राम को बबूल की गोंद के साथ मिलाकर सेवन करें इससे लाभ मिलेगा।
                                                              31. कान का दर्द:

                                                              कान का दर्द:

                                                                गुग्गुल और जीरे को पीसकर आग पर रखकर पका लें। पकते समय जो इसमें से धुंआ निकलता है उस धुंए को कान में लेने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।
                                                                32. कान के कीड़े:

                                                                कान के कीड़े:

                                                                  गुग्गुल का धुंआ कान में लेने से कान के सारे कीड़े मर जाते हैं।
                                                                  33. दस्त के साथ आंव आना:

                                                                  दस्त के साथ आंव आना:

                                                                    240 से 960 मिलीग्राम गुग्गुल को इन्द्रजौ और गुड़ के साथ रोजाना सेवन करने से दस्त के साथ आंव आने की अवस्था में आराम मिलता है।
                                                                    34. गर्भाशय के रोग:

                                                                    गर्भाशय के रोग:

                                                                      पुराने से पुराना गर्भाशय की सूजन होने पर गुग्गुल की लगभग 0.12 ग्राम से 0.96 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम गुड़ के साथ सेवन करने से कई प्रकार के गर्भाशय के रोग ठीक हो जाते हैं। जब तक गर्भाशय से सम्बंधित रोग ठीक न हो जाए तब तक 4 से 6 घंटे के अन्तर पर इसका सेवन करते रहना चाहिए।
                                                                      35. कमर के दर्द में:

                                                                      कमर के दर्द में:

                                                                        • गुग्गुल, गिलोय, हरड़ के बक्कल, बहेड़े के छिलके और गुठली सहित सूखे आंवले इन सबको 50-50 ग्राम लेकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में से आधा चम्मच चूर्ण 1 चम्मच अरण्डी के तेल के साथ रोजाना सेवन करें। इसे लगभग 20 दिन तक सेवन करने से कमर दर्द ठीक हो जाता है।
                                                                        • गुग्गुल को पानी में उबालकर गाढ़ा लेप बनाए और इससे कमर पर मालिश करें इससे लाभ मिलेगा।
                                                                        • 3 ग्राम शुद्ध गुग्गुल की गुठली निकालें और उसे 1 छुआरे में रख दें फिर इसके ऊपर गीले आटे का लेप कर दें। इसके बाद इसे गर्म राख में रख कर भून लें और इसे पीसकर चने के बराबर गोलियां बना लें और छाया में रखकर सुखा लें। इसमें से 1 गोली सुबह-शाम साफ साफ पानी के साथ लेने से कमर दर्द ठीक हो जाता है।
                                                                        • गुगल को पानी में उबालकर लेप बना लें और इस लेप को कमर पर लगाए इससे कमर दर्द ठीक हो जाता है।
                                                                        36. अधिक कमजोरी होना:

                                                                        अधिक कमजोरी होना:

                                                                          240-960 मिलीग्राम गुग्गुल सुबह-शाम शहद या घी के साथ सेवन करने से कमजोरी दूर हो जाती है।
                                                                          37. उरूस्तम्भ जांघों में सुन्नता:

                                                                          उरूस्तम्भ जांघों में सुन्नता:

                                                                            रोजाना दिन में 2 बार लगभग 360 मिलीग्राम से लगभग 960 मिलीग्राम कैशोर गुग्गुल लें और इसको रास्ना और घी के साथ मिलाकर खाने से उरुस्तम्भ ठीक हो जाता है।
                                                                            38. लकवा (पक्षाघात-फालिस):

                                                                            लकवा (पक्षाघात-फालिस):

                                                                              • लगभग 240 मिलीग्राम से 960 मिलीग्राम कैशोर गुग्गुल के साथ रास्ना एवं घी सुबह और शाम को सेवन करने से लकवे में फायदा मिलता है।
                                                                              • एरण्ड के तेल में गुग्गुल को पीसकर लेप बनाएं और पीड़ित अंगों पर कुछ हफ्तों तक नियमित मालिश करें इससे आराम मिलेगा।
                                                                              • लगभग 100 ग्राम माल कांगनी, 5 ग्राम सिंगिया, 5 ग्राम संखिया, 10 ग्राम धतूरे के बीज, 5 ग्राम जायफल, 5 ग्राम सफेद गोमती, 500 ग्राम नारियल का तेल, 500 ग्राम अण्डी का तेल और 250 मिलीलीटर अलसी का तेल इन सभी को मिलाकर आंच पर लाल होने तक उबालें। इसके बाद इसे छानकर बोतल में भर लें। इस तेल से प्रतिदिन लकवा ग्रस्त भाग पर 4 बार मालिश करें इससे लाभ मिलता है।
                                                                              39. अन्ननली (आहार) में जलन:

                                                                              अन्ननली (आहार) में जलन:

                                                                                गुग्गुल की 240 मिलीग्राम से लेकर 960 मिलीग्राम तक गुड़ के साथ सेवन करने से आहार नली की जलन दूर हो जाती है।
                                                                                40. भगन्दर:

                                                                                भगन्दर:

                                                                                  • गुग्गुल और त्रिफला का चूर्ण 10-10 ग्राम को जल के साथ पीसकर हल्का गर्म करें, इस लेप को भगन्दर पर लगाने से लाभ मिलता है।
                                                                                  • शुद्ध गुगल 50 ग्राम, त्रिफला 30 ग्राम और पीपल 15 ग्राम लेकर इसे कूट छानकर इसमें थोड़ा सा पानी मिलाकर चने के बराबर गोलियां बना लें। इन गोलियों को छाया में सूखाकर लगातार 15-20 दिन तक 1-1 गोली सुबह-शाम सेवन करें। इससे भगन्दर ठीक होता है।
                                                                                  41. नष्टार्तव (मासिकधर्म रुक जाना):

                                                                                  भगन्दर:

                                                                                    माहवारी यदि किसी गर्भाशय के दोष (विकार) के कारण रुक गई हो तो गुग्गुल 2 से 8 रत्ती (0.24 ग्राम से 0.96 ग्राम) मात्रा को एलुवा (मुसब्बर) और कसीस के साथ मिलाकर गोलियां बना लें और सुबह-शाम एक-एक गोली का सेवन करें इससे मासिकस्राव जारी हो जाता है।
                                                                                    42. प्रदर रोग:

                                                                                    प्रदर रोग:

                                                                                      1 ग्राम गुग्गुल रोजाना रसौत के साथ 3 बार सेवन करने से प्रदर में लाभ मिलता है।
                                                                                      43. दूध की उल्टी करना:

                                                                                      दूध की उल्टी करना:

                                                                                        गुग्गुल को गाय के पेशाब में पकायें, फिर दूध और फिरघी में पकायें जब यह काढ़ा तथा शुद्व हो जाये तब बच्चे को इसे पिलाये इससे बच्चा दूध की उल्टी करना बंद कर देता है।
                                                                                        44. पेट में पानी भरना (जलोदर):

                                                                                        दूध की उल्टी करना:

                                                                                          गुग्गुल को गुड़ के साथ रोजाना दिन में 3 से 4 खुराक के रूप में सेवन करने से पेट में सूजन और जलोदर ठीक हो जाता है।
                                                                                          45. गिल्टी (ट्यूमर):

                                                                                          गिल्टी (ट्यूमर):

                                                                                            सलई गुग्गुल गर्म पानी में घिसकर सुबह-शाम गिल्टी पर बांधने से फायदा मिलता है। 600 से 1200 मिलीग्राम गुग्गुल रोजाना सुबह-शाम सेवन करने से रोग में इस रोग में लाभ होता है।
                                                                                            46. पेट का बड़ा होना (आमाशय का फैल जाना):

                                                                                            पेट का बड़ा होना (आमाशय का फैल जाना):

                                                                                              गुग्गुल की 240 मिलीग्राम से 960 मिलीग्राम की मात्रा में सुबह और शाम सेवन करने से इस रोग में लाभ मिलता है तथा आमाशय का फैलाव भी दूर हो जाता है।
                                                                                              47. मोटापा:

                                                                                              मोटापा:

                                                                                                • शुद्ध गुग्गुलु की 1 से 2 ग्राम को गर्म पानी के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से लाभ मिलता है और मोटापन दूर होता है।
                                                                                                • गुग्गुल, त्रिकुट, त्रिफला और काली मिर्च को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें, फिर इस बने चूर्ण को अच्छी तरह एरण्ड के तेल घोटकर रख लें, इस चूर्ण को रोजाना 3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से मोटापापन दूर होता है।
                                                                                                48. प्लेग रोग:

                                                                                                प्लेग रोग:

                                                                                                  धूप और गुग्गुल को हवन सामग्री के जले हुए उपले पर जलाकर धूआं करने से दूषित वातावरण शुद्ध हो जाता है और प्लेग (चूहों से होने वाली बीमारी) जैसी बीमारी का प्रकोप दूर हो जाता है।
                                                                                                  49. अंगुलबेल (डिठौन) :

                                                                                                  अंगुलबेल (डिठौन) :

                                                                                                    घी में गुग्गुल को मिलाकर मलहम बनाकर अंगुली की सूजन पर लेप करने से इस रोग में जल्द आराम मिलता है।
                                                                                                    50. उपदंश (फिरंग):

                                                                                                    उपदंश (फिरंग):

                                                                                                      • गुग्गल का 5 ग्राम चूर्ण अनन्तमूल के काढ़े के साथ सेवन करने से उपदंश में लाभ होता है।
                                                                                                      • उपदंश चाहे कितना भी पुराना हो सलई गुग्गुल 0.60 से 1.20 ग्राम की मात्रा सुबह-शाम घी या मक्खन के साथ खाने से यह रोग ठीक हो जाता है।
                                                                                                      51. फोड़ा:

                                                                                                      फोड़ा:

                                                                                                        गुग्गल को घोलकर फोड़े पर लेप की तरह लगाने से फोड़ा ठीक हो जाता है।
                                                                                                        52. पाण्डुरोग (पीलिया):

                                                                                                        पाण्डुरोग (पीलिया):

                                                                                                          योगराज गुग्गुल को गोमूत्र के साथ सेवन करने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है।
                                                                                                          53. खून में पीव आना (प्याएमिया):

                                                                                                          खून में पीव आना (प्याएमिया):

                                                                                                            120 से 960 मिलीग्राम गुग्गुल प्रतिदिन सुबह-शाम गुड़ के साथ खाने से खून में पीव का बनना बंद हो जाता है और खून साफ हो जाता है।
                                                                                                            54. सौन्दर्यप्रसाधन:

                                                                                                            खून में पीव आना (प्याएमिया):

                                                                                                            खून में पीव आना (प्याएमिया):

                                                                                                              240 मिलीग्राम से 960 मिलीग्राम गुग्गुल को घी के साथ लगातार सुबह और शाम सेवन करने से चेहरे पर के फोड़े-फुंसियां ठीक हो जाते हैं तथा चेहरा साफ और सुन्दर हो जाता है और चेहरे पर चमक आ जाती है।
                                                                                                              55. शरीर में सूजन:

                                                                                                              शरीर में सूजन:

                                                                                                                • लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में गुग्गल और त्रिफला के चूर्ण को मिलाकर रात में हल्का गर्म पानी के साथ सेवन करने से लम्बे समय से बनी हुई कब्ज की शिकायत दूर हो जाती है तथा शरीर में होने वाले सूजन भी दूर हो जाते हैं।
                                                                                                                • लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में गुग्गल, रेवन्दचीनी, लाइफबोय साबुन और मैनफल को पानी में पीस लें, इसे गर्म करके कपड़े पर फैलाकर सूजन पर रखकर पट्टी कर लें इससे लाभ मिलता है।
                                                                                                                56. गंडमाला (स्कोफुला):

                                                                                                                गंडमाला (स्कोफुला):

                                                                                                                  • गुग्गुल को पानी में घोलकर लेप बना लें और इस लेप को दिन में 3 से 4 बार गांठों पर लगाएं इससे तुरन्त लाभ मिलेगा।
                                                                                                                  • लगभग 120 मिलीग्राम से 960 मिलीग्राम गुग्गुल को गुड़ के साथ प्रतिदिन 3 से 4 बार सेवन करें इससे लाभ मिलेगा। अधिक लाभ पाने के लिए गुग्गुल को सोमल, पारद और वायविडंग के साथ सेवन करें। सावधानी: गुग्गुल का सेवन करने वाले रोगियों को खटाई, मिर्च, कच्चे पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए और न ही संभोग क्रिया करनी चाहिए।
                                                                                                                  • गुग्गुल का सेवन करने वाले रोगी को शराब, मदिरा और कोई भी नशें का पदार्थं जो वह सेवन करता हो तुरन्त ही छोड़ देना चाहिए।
                                                                                                                  • इसका सेवन करने वालों को क्रोध नहीं करना चाहिए।
                                                                                                                  • कई योग गुग्गुल के ऐसे भी होते हैं जिनमें नाम मात्र का भी परहेज नहीं होता है जैसे-योगराज गुग्गुल इत्यादि।
                                                                                                                     


                                                                                                                  Tags: Purana gugool, Naya gugool, gugool ka rang, gugool ke gun, Phoda, Gandmala, Updansh