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चर्म रोग में


चर्म रोग में

Skin diseases


मसाज से रोगों का उपचार :

परिचय-

        त्वचा पर सूखी खारिश होने पर मालिश की क्रिया काफी लाभदायक साबित होती है। खून के दूषित हो जाने और उसमें अधिक अम्लता के कारण गर्मी पैदा हो जाने से शरीर में खारिश हो जाती है। इस रोग में हल्के नीले रंग की बोतल में तैयार किए हुए तेल में नींबू का रस मिलाकर शरीर की मालिश की जाए तो काफी अच्छे नतीजे सामने आते हैं। रोगी को अपने भोजन में सुधार करना चाहिए तथा पानी में नींबू का रस मिलाकर अधिक प्रयोग करना चाहिए। यदि रोगी कुछ दिन उपवास करें तथा केवल पानी ही पियें तो उसे बहुत जल्दी लाभ मिलता है। यदि रोगी ऐसा न कर सके तो वह 1-2 दिन का उपवास रखकर, कुछ दिन फल और सब्जी पर बिताए तथा बाद में धीरे-धीरे भोजन पर आए। आंवला और गाजर में विटामिन `सी´ और `कैल्शियम´ प्रचुर मात्रा में होता है। इन दोनों की कमी से भी त्वचा में खारिश और अन्य रोग पैदा होते हैं।

        एक्जिमा के रोगी को हरे रंग की बोतल के तेल में नींबू का रस मिलाकर मालिश करनी चाहिए। मिट्टी की पट्टी भी इस रोग में लाभदायक होती है। चर्म रोगों के रोगी को रोजाना सुबह 20 मिनट का कटि-स्नान अवश्य देना चाहिए। कटि-स्नान शरीर की गर्मी निकालने में बहुत उपयोगी होता है। यह एक्जिमा की बीमारी में जरा देर से असर करता है अत: रोगी को बिल्कुल भी घबराना नहीं चाहिए। धैर्य रखकर उपचार कराना चाहिए। ध्यान रहे कि मलहम आदि से यह रोग समाप्त नहीं होता है।

         यदि किसी व्यक्ति को `सुराइसिस´ हो जाए तो उसकी हल्के नीले रंग की बोतल में तैयार तेल से या जैतून के तेल से मालिश करनी चाहिए। रोगी के पूरे शरीर को हरे केले के पत्तों से ढककर उसे धूप स्नान कराना चाहिए। इस दौरान रोगी के सिर पर गीला तौलिया डाल दें, ताकि उसका सिर ठण्डा रहे। सप्ताह में 2 बार गीली चादर लपेटें। रोगी को भोजन में संतरे, गाजर का रस, आंवले आदि का अधिक प्रयोग कराना चाहिए। यदि रोगी कुछ महीने तक मात्र संतरे और दूध पर रहे तो उसे लाभ मिलता है।

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