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मालाबारी मालिश (पांव-मालिश)


मालाबारी मालिश (पांव-मालि)

Malabarian massage


मसाज से रोगों का उपचार :

परिचय-

          मालाबारी मालिश दक्षिण भारत में स्थित मालाबार के क्षेत्र में छोटे-मोटे चिकित्सालयों में की जाती है। इसके बारे में निर्धारित नियमों की व्याख्या हम कुछ एक रूप में कर रहे हैं जैसे- जिस कमरे में यह मालिश की जाती है, उस कमरे की छत पर किसी कुंडे को लगाया जाता है। कुंडे में एक विशेष प्रकार का बटा हुआ रस्सा बांधा जाता है। उसके सिर पर एक मोटी गोलाकार गांठ होती है, जिसे पकड़कर मालिश करने वाला मालिश करते समय अपना संतुलन बनाता है। उस रस्से को पकड़कर रोगी की शारीरिक स्थिति और किस अंग पर कैसा दबाव डालना है, इस बात का ध्यान रखकर रस्से के सहारे दबाव डालकर मालिश की जाती है।

        इस मालिश को करते समय रोगी को सीधा लिटाकर मालिश की जाती है। एक प्लेट में तेल रखा होता है। मालिश करने वाला उस रस्से के सहारे खड़ा होकर पहले अपने पांवों के तलुवों में तेल लगाता है, उसके बाद रोगी की टांगों पर पांवों से ही तेल लगाता है। टांगों के तलुवे को रोगी की टांगों की मांसपेशियों पर चलाते हैं, परन्तु हड्डी पर दबाव नहीं डालते हैं। यहां पांव के हर भाग से काम लिया जाता है। जिस तरह से पांव सुविधापूर्वक ऊपर-नीचे चल सकते हैं, चलाते हैं।

        ध्यान रहे कि मालिश का ऐसा कोई नियम नहीं है कि मालिश हृदय की ओर से ही करनी है। जांघों के ऊपर दबाव डालकर अपने पांवों को फिसलाते हैं। इस मालिश में तेल का प्रयोग अधिक किया जाता है, ताकि मालिश करते समय पांव सुविधापूर्वक चल सके। पेट की बड़ी आंत पर थोड़ा दबाव डालकर, पेट पर दाएं से बाएं पांव के अगले भाग से मसलते हैं। पूरे पांव को भी कई बार ऊपर से नीचे की तरफ चलाते हैं। पांवों को छाती पर नीचे से पसलियों के साथ-साथ बगलों में ले जाते हैं तथा गले से नीचे लाते हैं। गर्दन पर पांव के ऊपरी भाग से मालिश की जाती है तथा अगले भाग पर पांव के अंगूठे तथा अंगुलियों से मालिश करते हैं। इसी प्रकार बाजुओं पर भी ऊपर-नीचे तेल की मदद से पांव को फिसलाते हैं।

        सीधी तरफ से पूरी मालिश हो जाने के बाद रोगी को पेट के बल लिटा दिया जाता है तथा उसके घुटनों के नीचे गोल गद्देदार कपड़ा रख दिया जाता है, ताकि पांव के दबाव से घुटनों में दर्द न हो। उसके बाद पांव की मदद से रोगी की पीठ पर तेल लगाया जाता है तथा रीढ़ पर पांव चलाते हैं। दबाव देते हुए रीढ़ के दोनों तरफ पांव को फिसलाया जाता है। टांगों की मालिश पांव को ऊपर-नीचे और दाएं-बाएं फिसलाकर व चलाकर करते हैं। पांवों द्वारा कमर पर सीधा घर्षण दिया जाता है तथा नितम्बों यानी कूल्हों को पांव से अच्छी तरह मसला जाता है। पहले पांव कूल्हों से घुटनों के पास लाते हैं, फिर दबाव देकर पांव को आगे पिण्डलियों पर ले जाते हैं। वहां दोबारा दबाव डालते हैं, परन्तु हड्डी का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस मालिश का उद्देश्य मांसपेशियों को कोमल करना है, ताकि उनमें शुद्ध रक्त का संचार हो सके तथा वहां से छिपे विकार निकल सकें।

        पांव की मालिश करने वाले काफी फुर्तीले होते हैं वे बहुत आसानी से अपना पांव चारों तरफ चलाकर कुछ ही समय में रोगी के पूरे सारे शरीर की मालिश कर देते हैं। अगर किसी रोगी के विशेष अंग की मालिश करनी हो, तो उसी अंग से मालिश की जाती है। मालिश में अधिकतर दायां पांव प्रयोग में लाया जाता है, परन्तु आवश्यकता पड़ने पर दूसरे पांव का प्रयोग भी किया जाता है। वैसे मालिश करने वाले का दूसरा पांव जमीन पर रखा होता है। इस मालिश को करने वालों के पांव खुरदुरे न होकर, मालिश करते रहने के कारण बड़े ही मुलायम होते हैं।