योग द्वारा सुंदरता

Rojana yogasan karane se stri ka swasthy aur khoobsoorati dono men hi badotari hoti ahi. Agar sharer men khoon ka bahav aur bhojan pachane ki kriya thik hog to khoobsoorati men nikhar to ayega.


योगासन से शरीर और दिल-दिमाग में एक संतुलन सा आता है। मन जगह-जगह नहीं भटकता है। अपने अन्दर का आत्मविश्वास बढ़ता है। शरीर के अन्दर खून की गति को ठीक करने, अंगों को लचीला और गतिशील बनाने तथा दिमाग के बेकार विचारों से छुटाकारा दिलाने की दृष्टि से योगक्रिया दूसरी सारी चिकित्सा पद्धतियों से अच्छी मानी जाती है................ 
मन, वचन और कर्म के द्वारा किसी भी व्यक्ति को वासना भरी नजर से नहीं देखना चाहिए। सब्र रखना चाहिए। योगासन करने के लिए जमीन पर दरी या चटाई बिछा लेनी चाहिए। उस स्थान पर अंधेरा और सीलन नहीं होनी चाहिए बल्कि शान्त और हवादार वातावरण होना चाहिए। चित्त को शान्त और एक तरफ ही रखें। शौच आदि से निवृत्त होकर योगासन करना चाहिए................ 
सबसे पहले अपने दोनों पैरों को एकसाथ मिलाकर बिल्कुल सीधे खड़े हो जाएं। इसके बाद बाएं पैर पर खडे़ रहते हुए दाएं पैर को पद्मासन की मुद्रा में बाईं जांघ पर लगा लें। अन्त में दोनों हाथों को प्रार्थना की मुद्रा में जोड़कर सिर से ऊपर उठा लें................... 
हमारे धार्मिक ग्रंथों के अनुसार योग स्वास्थ्य के लिए सबसे अच्छे व्यायाम के रूप में माना जाता है। योग हमे सिखाता है कि स्वस्थ व्यक्ति शारीरिक व मानसिक रूप से सामंजस्य पूर्ण एक समेकित इकाई होता है। इसलिए अच्छे स्वास्थ्य के लिए शान्त ओर साफ मन तथा आत्मा-परमात्मा के मिलन के प्रति पूरी संचेतन आत्मा की जरूरत है................... 
ध्यान लगाने के लिए किसी भी शान्त सी जगह पर चटाई बिछाकर पद्मासन की मुद्रा में बैठकर मुंह को उत्तर या पूर्व दिशा मे करके पूरे शरीर और मन को आराम दें। समान रूप से सांस लेते हुए आंखों को बन्द करके बिल्कुल शान्त मन से अपने ईष्ट देवी-देवताओं पर ध्यान लगा लें। अब मन ही मन मे अपने गुरुमन्त्र या किसी पवित्र मन्त्र का जाप करें................ 
सबसे पहले जमीन पर बैठ जाएं और अपने दोनों हाथों को बिल्कुल सीधे ऊपर की तरफ उठा लें। फिर हाथों को जितना ऊपर की ओर खींच सके, खींच लें। इस मुद्रा में आपके पैर के पंजों का रुख ऊपर की तरफ ही होना चाहिए................ 
हमारे देश में पुराने समय से ही योग का बहुत महत्व रहा है। कहते हैं मन और शरीर को एक जगह लगाकर भगवान को खोजने का उपाय ही योग है। बहुत से महान साधु-सन्तों ने संसार को आत्मविश्वास द्वारा योग विज्ञान के बारे में बताया कि प्राणी का मन और शरीर दोनों का अपना अलग-अलग अस्तित्व है और ये उसे अलग-अलग दिशाओं में खींचते हैं...................