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लघु मस्तिष्क का कार्य


लघु मस्तिष्क का कार्य


परिचय-

        हमारे शरीर में जब भी कोई गति होती है, तो इससे कुछ पेशियों का संकुचन होता है तथा कुछ का प्रसार। शरीर में होने वाली प्रत्येक गति के लिए इन दोनों क्रियाओं का होना काफी जरूरी होता है, जब हम कोहनी को मोड़ते हैं, तो उसके सामने वाली पेशियां सिकुड़ जाती हैं, तथा पिछली पेशियां ढीली पड़ जाती हैं। इससे हमारी कोहनी आसानी से मुड़ जाती है। यदि संकुचन करने वाली पेशियां अपना कार्य सही करें तथा प्रसार वाली पेशियां ढीली न पड़ें तो इस हालत में कोहनी का मुड़ना असम्भव है। यही बात हमारे चलने, बैठने, खड़े होने आदि गतियों पर भी लागू होती है।

        मस्तिष्क कुछ पेशियों को संदेशवाहक नाड़ियों के द्वारा संकुचन का आदेश देता है तथा कुछ पेशियों को प्रसार करने की आज्ञा देता है। जब इन दोनों प्रकार की आज्ञाओं का सही पालन होता है, तब गतियां अच्छी तरह होती हैं। सभी गतियां अच्छी तरह हों, इस बात के लिए लघु मस्तिष्क जिम्मेदार होता है। लघु मस्तिष्क की सेलों के कुछ तार ऐसे हैं, जो बड़े मस्तिष्क के गति क्षेत्र तक पहुंचते हैं। इन तारों की मदद से लघु यानी छोटा मस्तिष्क, मस्तिष्क के बाएं भाग का सहायक या सहकारी होता है तथा बायां भाग दाएं भाग का सहकारी होता है।

        इस प्रकार शरीर के बाएं भाग में होने वाली गतियों का लघु मस्तिष्क के बाएं भाग से तथा दाहिने भाग में होने वाली गतियों का लघु मस्तिष्क के बाएं भाग से तथा दाहिने भाग में होने वाली गतियों का लघु मस्तिष्क के दाएं भाग से घनिष्ठ सम्बंध है। कुछ रोगों के कारण लघु मस्तिष्क खराब हो जाता है तथा कभी-कभी उसमें फोड़ा भी बन जाता है। लघु मस्तिष्क के बिगड़ जाने पर शरीर की गतियां ठीक से नहीं हो पाती। रोगी की चाल ऐसी हो जाती है जैसे किसी शराबी की चाल। उसके पैर जमीन पर अच्छी तरह नहीं पड़ते और वह झूमता तथा लड़खड़ाता हुआ-सा चलता है।

        जब शरीर में गतियां ठीक-ठीक होती हैं तो शरीर की स्थिति सामान्य रहती है। लघु मस्तिष्क का काम केवल शरीर की स्थिति सामान्य बनाये रखना होता है।