शयनासन


शयनासन

 Shayana asana


 शयनासन आसन को स्वच्छ हवादार स्थान पर करना चाहिए। इसके लिए नीचे दरी बिछाकर बैठ जाएं। पैरों को घुटनों से मोड़कर पीछे की ओर करके रखें। आसन की विधि- 

          शयनासन आसन को स्वच्छ हवादार स्थान पर करना चाहिए। इसके लिए नीचे दरी बिछाकर बैठ जाएं। पैरों को घुटनों से मोड़कर पीछे की ओर करके रखें। अब घुटनों को मिलाकर रखें तथा पंजों के बीच दूरी रखकर उस पैर बैठ जाएं। इसके बाद हाथों के सहारे पहले कोहनी उसके बाद हथेलियों का सहारा लेते हुए शरीर को धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकाते हुए सिर को फर्श से टिका दें। दोनों हाथों को जोड़कर नमस्कार की स्थिति बनाएं। इस स्थिति में 1 से 3 मिनट तक गहरी सांस लें। फिर पहले की तरह ही हाथों का सहारे लेते हुए धीरे-धीरे शरीर को सामान्य स्थिति में ले आएं। पुन: इस आसन को करें तथा इस तरह से इस आसन को 3 से 5 बार करें।

आसन से रोगो में लाभ-

          इस आसन से गर्दन शक्तिशाली बनती है। यह आसन पिटयुटरी मिनिअल, थायराइड तथा वार्डिनल ग्रंथियों पर प्रभाव डालता है। यह नाड़ी संस्थान, गुर्दे, पेट, आंतें, प्रजनन अंग तथा कामेन्द्रियों सम्बन्धी नाड़ियों को शक्तिशाली बनाता है।

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