हर्निया


हर्निया

Hernia 


योगाभ्यास से रोग का उपचार :

परिचय-

          आंत का अपने स्थान से हट जाना या उतर जाना ही हर्निया कहलाता है। यह कभी अंडकोष में उतर जाती है तो कभी पेड़ु या नाभि के नीचे खिसक जाती है। यह स्थान के हिसाब से कई तरह की होती है जैसे- स्टैगुलेटेड, अम्बेलिकन आदि। जब आंत अपने स्थान से अलग होती है तो रोगी को काफी दर्द और कष्ट का अनुभव होता है। 

          इसे छोटी आंत का बाहर निकलना भी कहा जाता है। खासतौर पर यह पुरुषों में वक्षण नलिका से बाहर निकलकर अंडकोष में आ जाती है। स्त्रियों में यह वंक्षण तंतु लिंगामेन्ट के नीचे एक सूजन के रूप में रहती है। इस सूजन की एक खास विशेषता है कि नीचे से दबाने से यह गायब हो जाती है और छोड़ने पर वापस भी आ जाती है। इस रोग में कम से कम भोजन करना चाहिए। इससे कब्ज नहीं बनता है। इस बात का खासतौर पर ध्यान रखें कि मलत्याग करते समय जोर न लगे क्योंकि इससे आंत और ज्यादा खिसक जाती है। 

हर्निया रोग स्त्री-पुरुष दोनों को हो सकता है। यह रोग 3 प्रकार का होता है-

  • वेक्षण हर्निया (इंग्वाइनल हर्नियां)
  • नाभि हर्निया (अम्बिलाइकल)
  • जघनास्थिक हर्निया (फीमोरल हर्निया)

वेक्षण हर्निया (इंग्वाइनल हर्निया)-

           इस तरह का हर्निया रोग जांघ के जोड़ में होता है तथा इसमें अंडकोष जांघ की पतली नली की सहायता से अंडकोष में खिसक जाते हैं। ऐसी स्थिति अधिकतर जन्म से पहले होती है। हर्निया से पीड़ित अंग के अंडकोष में खिसक जाने के कारण उसका आकार बढ़ जाता है। अंडकोष में सूजन के कारण हर्निया व हाइड्रोसिल में अंतर करना कठिन हो जाता है। यह अधिकतर बाहरी हर्निया होता है और सामान्यता पुरुषों में पाया जाता है। लगभग 70 प्रतिशत हर्निया इसी प्रकार का होता है।

नाभि हर्निया (अम्बिलाइकल हर्निया)-

          यह भी एक सामान्य हर्निया का ही एक रूप है। इस हर्निया रोग के होने की मात्रा 8 से 10 प्रतिशत होती है। यह जन्म के समय या शैशवकाल में होता है। यह किसी मोटे व्यक्ति या जिनके पेट की मांसपेशियां कमजोर हो या बड़े उम्र के व्यक्ति को होता है। इसमें हर्निया की थैली नाभि से बाहर उभर आती है क्योंकि यही पेट की कमजोर मांसपेशी रहती है।

जघनास्थिक हर्निया (फीमोरल हर्निया)-

          यह हर्निया 20 प्रतिशत लोगों में होता है। यह रोग पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों में अधिक होता है। इस रोग में पेट के पदार्थ जंघा के सामने जांघ की पैर में जाने वाली धमनी में स्थित मुंह द्वारा बाहर आ जाते हैं। यह धमनी पैर में खून की आपूर्ति करती है।

कारण-

  • हर्निया रोग अनेक कारणों से उत्पन्न होता है। यह रोग पेट की मांसपेशियों या स्नायुओं (नर्वसस्टिम) की जन्मजात कमजोरी या बच्चे में विकास के क्रम की शुरुआती अवस्था में उत्पन्न होता है।
  • जब कोई स्त्री या पुरुष बिना सावधानी के झटके के साथ किसी वजनदार वस्तु को उठाते हैं, तो मांसपेशियां व स्नायु फट जाते हैं और हर्निया उभर आता है।
  • पेट की ऐसी स्थिति, जिसमें पेट के अन्दर का दबाव बढ़ जाता है, के कारण हर्निया रोग उत्पन्न होता है। बूढ़े व्यक्ति में पुरुष ग्रंथि के कारण, मूत्र मार्ग में रुकावट आना, धूम्रपान करने वाले व्यक्ति में उत्पन्न खांसी तथा अधिक कब्ज के कारण हर्निया रोग उत्पन्न होता है।
  • हमेशा एक ही स्थिति में बैठने के कारण, शारीरिक व्यायाम की कमी के कारण, पेट की मांसपेशियों की कमजोरी, मोटापा तथा जरूरत से अधिक भोजन करने के कारण भी हार्निया रोग हो जाता है। ऐसी स्थितियों में पेट की मांसपेशियां नीचे की ओर दबाव डालने लगती हैं जिससे पेट पूर्ण रूप से बाहर निकल आता है।
  • गर्भावस्था तथा प्रसव (बच्चे के जन्म) के समय पेट में दबाव बढ़ने से भी हर्निया रोग हो जाता है।

यौगिक क्रिया द्वारा रोग की चिकित्सा-

          योगाभ्यास के द्वारा हार्निया रोग को ठीक किया जाता है। यह अत्यंत लाभकारी साधना है तथा सभी हार्निया रोगियों को इसका अभ्यास प्रतिदिन करना चाहिए।

षट्क्रिया (हठयोग क्रिया)

इस रोग में नेति क्रिया करें तथा सप्ताह में एक बार लघु शंख प्रक्षालन क्रिया का अभ्यास करें।

छाती, पेट, कटि व पैरों के लिए यौगिक क्रिया का अभ्यास करें-

आसन

पवन मुक्तासन या उत्तानपादासन या सर्वांगासन या पश्चिमोतान आसन या मत्स्यासन या व्रजासन या शशांकासन। इनमें से किसी एक आसन का अभ्यास करें।

मुद्रा व बंध

इसमें अश्विनी मुद्रा या वज्रोली मुद्रा या मूल बंध का अभ्यास करें।

प्राणायाम

भ्रामरी प्राणायाम या अंतर कुंभक के साथ भस्त्रिका प्राणायाम या अनुलोम-विलोम प्राणायाम का अभ्यास करें।

समय

इस योगाभ्यास को प्रतिदिन 30 मिनट तक करें।

प्रेक्षा

इसमें प्राणायाम का अभ्यास करते हुए पेट की मांसपेशियां, आंतें, मलाशय, मलाशय की मांसपेशियों व गुदा नलिका का मन में ध्यान करना चाहिए।

अनुप्रेक्षा (मन के विचार)

सांस क्रिया के साथ मन में विचार करें- ´´पेट की मांसपेशियां शक्तिशाली हो रही हैं तथा रोग धीरे-धीरे ठीक हो रहा है।´´

विशेष-

          हर्निया रोग को दूर करने के लिए बताई गए यौगिक क्रिया में षट्क्रिया का अभ्यास सावधानी से किसी योग चिकित्सक की देख-रेख में करना चाहिए। इसमें प्राणायाम का अभ्यास करते हुए पेट के अंगों के विषय में ध्यान करना चाहिए तथा वह ठीक हो रहा है, ऐसा अनुभव करना चाहिए।

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