Error message

  • Warning: Illegal string offset 'field' in DatabaseCondition->__clone() (line 1818 of /home/jkheakmr/public_html/main/includes/database/query.inc).
  • Warning: Illegal string offset 'field' in DatabaseCondition->__clone() (line 1818 of /home/jkheakmr/public_html/main/includes/database/query.inc).
  • Strict warning: Only variables should be passed by reference in fancy_login_page_alter() (line 109 of /home/jkheakmr/public_html/main/sites/all/modules/fancy_login/fancy_login.module).

Tips

Daily health tips :

1. बवासीर : बवासीर में आयापान के पत्तों को पीसकर लगाने तथा रस 10-20 मिलीलीटर दिन में 2-3 बार पीने से चमत्कारी लाभ होता है।
2.वमन (उल्टी) : आयापान के पंचाग के गर्म काढ़े को अधिक मात्रा में देने से वमन (उल्टी) हो जाती है तथा दस्त लग जाते हैं। इसका उपयोग पेट साफ करने के लिए करना चाहिए।
1.पित्त के अतिसार पर : अतीस, कुटकी की छाल और इन्द्रजव के चूर्ण को शहद में मिलाकर चटाना चाहिए। इससे पित्त के कारण उत्पन्न अतिसार ठीक हो जाता है। 
2.बच्चों के आमतिसार (दस्त) पर : सोंठ, नागरमोथा और अतीस का काढ़ा देना चाहिए। 
1.पेशाब का बार-बार आना : खरैटी की जड़ की छाल का चूर्ण यदि चीनी के साथ सेवन करें तो पेशाब के बार-बार आने की बीमारी से छुटकारा मिलता है।
2.प्रमेह (वीर्य प्रमेह) : अतिबला के बारीक चूर्ण को यदि दूध और मिश्री के साथ सेवन किया जाए तो यह प्रमेह को नष्ट करती है। महावला मूत्रकृच्छू को नष्ट करती है।
1.शीतज्वर : बड़ी अरनी की जड़ को मस्तक से बांधना चाहिए। इससे शीतज्वर नष्ट हो जाता है। 
2.स्तन में दूध की वृद्धि : छोटी अरनी की सब्जी बनाकर प्रसूता महिलाओं को खिलाने से उनके स्तनों में दूध की वृद्धि होती है। 
1.श्वेतप्रदर : महिलाओं में होने वाले श्वेतप्रदर तथा पेशाब की जलन को रोकना भी इसके विशेष गुणों में है।
2.पुरानी खांसी : छाती में जलन, पुरानी खांसी आदि को रोकने में यह सक्षम है।
3.हार्ट फेल : हार्ट फेल और हृदयशूल में अर्जुन की 3 से 6 ग्राम छाल दूध में उबालकर लें।
1.गर्मी से उत्पन्न रोग : अरीठे का फेन दिन में 2-3 बार लगाकर मलना चाहिए। इसके बाद गर्म पानी से धो लेना चाहिए
2.धूप में नंगे पैर घूमने से उत्पन्न हुई जलन : अरीठे के फेन को पैर पर मलने से ठंडक मिलती है।
1.खुजली : अरहर के पत्तों को जलाकर उसकी राख को दही में मिलाकर लगाने से खुजली मिटती है।
2. आधासीसी (आधे सिर का दर्द या माइग्रेन) : अरहर के पत्तों तथा दूब (दूर्वा घास) का रस इकठ्ठा करके नाक में लेने से आधासीसी में लाभ होता है।
1.सिर पर बाल उगाने के लिए : ऐसे शिशु जिनके सिर पर बाल नहीं उगते हो या बहुत कम हो या ऐसे पुरुष-स्त्री जिनकी पलकों व भौंहों पर बहुत कम बाल हों तो उन्हें एरंड के तेल की मालिश नियमित रूप से सोते समय करना चाहिए। इससे कुछ ही हफ्तों में सुंदर, घने, लंबे, काले बाल पैदा हो जाएंगे।

1.विष पर : जानवरों के काटने व सांप, बिच्छू, जहरीले कीड़ों के काटे स्थान पर अपामार्ग के पत्तों का ताजा रस लगाने और पत्तों का रस 2 चम्मच की मात्रा में 2 बार पिलाने से विष का असर तुरंत घट जाता है और जलन तथा दर्द में आराम मिलता है। इसके पत्तों की पिसी हुई लुगदी को दंश के स्थान पर पट्टी से बांध देने से सूजन नहीं आती और दर्द दूर हो जाता है। सूजन चढ़ चुकी हो तो शीघ्र ही उतर जाती है
अपामार्ग

1.बच्चों का पेट दर्द : अफारा (पेट में गैस बनना) या डिब्बा रोग पर इसके 1-2 बीजों को आग में भूनकर गाय के दूध अथवा घी के साथ बच्चों को देने से शीघ्र लाभ होता है।
2.कामला या पीलिया : जलोदर और बालकों के डिब्बा रोग में अपराजिता के भूने हुए बीजों के आधा ग्राम के लगभग महीन चूर्ण को गर्म पानी के साथ दिन में 2 बार सेवन कराने से पीलिया ठीक हो जाती है।

Pages