Error message

  • Warning: Illegal string offset 'field' in DatabaseCondition->__clone() (line 1818 of /home/jkheakmr/public_html/main/includes/database/query.inc).
  • Warning: Illegal string offset 'field' in DatabaseCondition->__clone() (line 1818 of /home/jkheakmr/public_html/main/includes/database/query.inc).
  • Strict warning: Only variables should be passed by reference in fancy_login_page_alter() (line 109 of /home/jkheakmr/public_html/main/sites/all/modules/fancy_login/fancy_login.module).

Ayurvedic-tips

Natural Remedies :

1.खांसी : बच्चों की खांसी में अगर और ईश्वर मूल (ईश्वर की जड़) को पीसकर सीने पर लेप करने से आराम होता है।
2.`दमा, श्वास रोग`` : अगर का इत्र 1 से 2 बूंद पान में डालकर खिलाने से तमक श्वास से छुटकारा मिल जाता है। 
1.आमातिसार (आंवयुक्त पेचिश) : भुनी हुई लहसुन की कली में लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग अफीम मिलाकर खाने से इस रोग में राहत में मिलती है।
2.उल्टी : कपूर, नौसादर और अफीम बराबर मात्रा में मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां शहद के साथ बना लें। दिन में 3 बार 1-1 गोली पानी के साथ लें।
1.खुजली : अडूसे के नर्म पत्ते और आंबा हल्दी को गाय के पेशाब में पीसे और उसका लेप करें अथवा अडूसे के पत्तों को पानी में उबाले और  उस पानी से स्नान करें।
2.गाढ़े कफ पर : गर्म चाय में अडूसे का रस, शक्कर, शहद और दो चने के बराबर संचल डालकर सेवन करना चाहिए।
1.गले के रोग : सूखे आंवले के चूर्ण को गाय के दूध में मिलाकर पीने से स्वरभेद (गले का बैठ जाना) ठीक हो जाता है।
1. गौरवर्ण, गोरापन : आलू को पीसकर त्वचा पर मलने से रंग गोरा हो जाता है
2. आंलाखों का जाला एवं फू : कच्चा आलू साफ-स्वच्छ पत्थर पर घिसकर सुबह-शाम आंख में काजल की भांति लगाने से पांच से छ: वर्ष पुराना जाला और चार वर्ष तक का फूला तीन महीने में साफ हो जाता है।

1. मलेरिया :आकड़े के फूल की दो डोडी (बिना खिले फूल)जरा-से गुड़ में लपेटकर मलेरिया ज्वर आने से पहले खाने से मलेरिया   नहीं चढ़ता है।
2. बुखार : आकड़े की कोंपल आखिरी छोर (नया पत्ता) नागरबेल के पान में रखकर थोड़ी सी सौंफ डालकर चबायें, रस चूसते जायें। इससे हर प्रकार का बुखार, मलेरिया, वायरल, सामान्य बुखार एक बार लेने से ठीक हो जाते हैं।

1.सभी प्रकार के विष पर : आक की जड़ ठंडे पानी में घिसकर पिलाना चाहिए या आक की 5-6 नरम पत्तियों के रस में घी            मिलाकर पीना चाहिए।
2. घुटनों के दर्द पर : आक का दूध तीन दिन तक लगाना चाहिए

1.रक्तप्रदर एवं श्वेतप्रदर : अश्वगंधा के चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर 1-1 चम्मच गाय के दूध में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने  से लाभ होता है।
2.गर्भपात : बार-बार गर्भपात होने पर अश्वगंधा और सफेद कटेरी की जड़ इन दोनों का 10-10 मिलीलीटर रस पहले 5 महीने तक सेवन करने  से अकाल में गर्भपात नहीं होगा और गर्भपात के समय सेवन करने से गर्भ रुक जाता है।

1. वमन (उल्टी) : अशोक के फूलों को जल में पीसकर स्तनों पर लेप कर दूध पिलाने से स्तनों का दूध पीने के कारण होने वाली             बच्चों की   उल्टी रुक जाती है।
2. रक्तातिसार : अशोक के 3-4 ग्राम फूलों को जल में पीसकर पिलाने से रक्तातिसार में लाभ होता है।
 
1.मूर्च्छा (बेहोशी) :  दाख (मुनक्का) और आंवले को समान मात्रा में लेकर, उबालकर पीसकर थोड़ा शुंठी का चूर्ण मिलाकर, शहद के साथ चटाने से बुखारयुक्त मूर्च्छा (बेहोशी) दूर हो जाती है। 

Pages